भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नारा महज नारा है / विपिन चौधरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

‘दुनिया के मज़दूरों एक हो जाओ’
पर बोलने से पहने सोचना होगा

हमारी एकता में इतने बल हैं कि
उन बलों को निकालते-निकालते
हमारी पीठ साबुत नहीं बची

नारे का झंडा थमाने वाले खुद
कहीं बाद में जान पाए कि
एक होने के लिए
समय और साधन होने चाहिए

एक होना तो दूर
भूख प्यास से
हमारी मेहनतकश आबादी
आधी-अधूरी हो गई

अधूरों को तोड़ना कहीं आसान होता है
हम टूटे
भर-भर टूटे