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ना गुइयाँ, हाँ गुइयाँ ! / रमेश तैलंग

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झूठ के पाँवों में
मेहँदी रचाना,
ना गुइयाँ, ना गुइयाँ,
ना गुइयाँ ना !

बातों ही बातों की
खिचड़ी पकाना,
ना गुइयाँ, ना गुइयाँ,
ना गुइयाँ ना !

दुःख में किसी के
जी को दुखाना,
ना गुइयाँ, ना गुइयाँ,
ना गुइयाँ ना !

काम पड़े तो
आँखें चुराना,
ना गुइयाँ, ना गुइयाँ,
ना गुइयाँ ना !

चार दिनों का है
मिलना-मिलाना,
हाँ गुइयाँ, हाँ गुइयाँ,
हाँ गुइयाँ हाँ !

प्यार का भूखा है
सारा ज़माना,
हाँ गुइयाँ, हाँ गुइयाँ,
हाँ गुइयाँ हाँ !