भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नुमू-पज़ीर हूँ हर दम कि मुझ में दम है अभी / अता तुराब

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

नुमू-पज़ीर हूँ हर दम कि मुझ में दम है अभी
मिरा मक़ाम है जो भी वो मुझ से कम है अभी

तराश ओर भी अपने तसव्वुर-ए-रब को
तिरे ख़ुदा से तो बेहतर मिरा सनम है अभी

नहीं है ग़ैर की तस्बीह का कोई इम्काँ
मिरे लबों पे तो ज़िक्र-ए-मनम मनम है अभी

‘तुराब’ कहाँ होता है ये ख़ुदा का ख़ला
मिरे वजूद के अंदर कहीं अदम है अभी