भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नौमण सौंठ, सवामण अजमो / मालवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

नौमण सौंठ, सवामण अजमो
येंई धमाधम खांडो पियाजी
कोई लोग सुणेगा
सासू सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
दौड़िया-दौड़िया आवेगा, तो ललना खिलावेगा
ललना खिलावेगा, तो दिन दस रेगा
दिन दस रेगा, तो घणो-घणो खावेगा
जापो बिगाड़ी घर जावेगा
पियाजी कोई लोग सुणेगा
माता सुणेगा, तो दौथ्ड़या-दौड़िया आवेगा
दौड़िया-दौड़िया आवेगा, तो ललना खिलावेगा
ललना खिलावेगा, तो दिन दस रेगा
दिन दस रेगा, तो थोड़ा-थोड़ा खावेगा
जापो सुधारी घर जावेगा
जेठानी सुणेगी, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
दौड़िया-दौड़िया आवेगा, तो फूंको धरेगा
फूंको धरेगा, तो नेग मांगेगा
जापो बिगाड़ी ने घर जावेगा
काकी सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
जापो सुदारी ने घर जावेगा
देराणी सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
दौड़िया-दौड़िया आवेगा, तो रसोई निपावेगा
दिन दस रेगा, खाट बिछावेगा
नेग लई ने जापो बिगाड़ेगा
जापो बिगाड़ी ने घर जावेगा
भाभी सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
जापो सुदारी ने घर जावेगा
नणंद सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
जापो सुदारी ने धर जावेगा।
नणंद सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
दौड़िया-दौड़िया आवेगा, तो सांतीपूड़ा लावेगा
नेग लई ने जापो बिगाड़ेगा
बेन आवेगा, तो जापो सुदारेगा
पड़ोसण सुणेगा, तो दौड़िया-दौड़िया आवेगा
आवेगा तो मंगल गावेगा
पेड़ा मांगी ने घर जावेगा
सखियां सुणेगा, तो दौड़ी आवेगा
जापो सुदारेगा।