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पहेलियाँ / भाग - 1 / पँवारी

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पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

घन पऽघन बत्तीस घन
कभी नी कटत बाबुर बन
उत्तर- छाया

ओंढ़ो कुआ, मोंढ़ो पानी।
ओमऽ नाचय छम-छम रानी।।
उत्तर- रई, मथनी

सर सराटा, ऊप्पर काटा।
ज्यू जी जीत्हे ओको बाप मराठा।
उत्तर- गल

कारी थी कजरारी थी, काले वन में रहती थी
चट्टक चुम्मा लेती थी, लाल पानी पीती थी
उत्तर- जूँ

कारी-गाय काटा खाय।
पानी खऽ देख-देख चमकत जाय।
उत्तर- जूता

पाँच भाई पाँच रंग
सालू बान्धय एक संग।
उत्तर- गन्ने का भीड़ा

एक बाप की दो बेटी, रमकु झमकु नाव
एक खाय खोपरा, दूसरी बाट खऽ खाय।
उत्तर- तराजू

काटय ते कटत नी
मारय ते मरत नी।
उत्तर- परछाई (छाया)

चार घड़ा अमृत सी भर्या
बिन ढकनी की उघड़ा पड़्या।
उत्तर- गाय के स्तन

राजा को बेटा छल्ली
घर फोड़ निकल्यो गल्ली।
उत्तर- धुआँ

हाट गई बाजार गई
लाल मूँगा दाब गई।
उत्तर- चूल्हे की आग

लच-लच लकड़ी टेक्या नहीं जाय
नार्या डखर रह्यो बोल्या नहीं जाय।
उत्तर- साँप

आड़ी-तेढ़ी बाँसरी बजावन वालो कोनऽ
दुरगा चली मायके, मनावन वालो कोनऽ।
उत्तर- नदी

घाम मऽ सुकत नी, छाय मऽ सुक जाय
बता का चीज आय, पवन लगय मर जाय।
उत्तर- पसीना (पस्या)

ऊप्पर सी गई, उगी दुगी
नीच्चऽ सी आई गाल फूगी।
उत्तर- पूड़ी (स्वारी) या रोटी

चार भाई रौन्दन-खौन्दन
दो भाई छुरी का बंधन
एक भाई मक्खी उड़ान्या।
उत्तर- पशु के चार पैर, दो सींग, एक पूंछ

झन्नाऊर बिन्नाऊर
बिन फोतला का चाऊर।
उत्तर- आकाश से गिरने वाली बर्फ (गार)

चार खूट चौलख तारा
ओमअ् हीण्डय दो बंजारा।
उत्तर- चार दिशाएँ व चाँद-सूरज

आवजी, सावजी
बिन डेठ को लिम्बू लावजी।
उत्तर- अण्डा

कोन पखेरू को नाव बतावय
दिन मऽ सोवय रात मऽ जागय।
उत्तर- चमगीदड़ (बन बागुर)

छोटी सी बितनी, काम करय कितनी
एक कहावत है-
जहाँ काम आये सुई, कहाँ करे तलवार।
उत्तर- सुई

एक सिंगी गाय
सब मुलुक को मार खाय।
उत्तर- घट्टी (चक्की)

नान्ही सी डब्बी मऽ
हाय-हाय का बीजा।
उत्तर- सूखी मिर्च।

एक अचम्भा हमनऽ देख्यो
कुआँ मऽ लग गई आग।
पानी-पानी जल गयो
मच्छी खेलय फाग।
उत्तर- चिलम।

बालपन मऽ कारा-कारा
जवानी मऽ लालम लाल
स्यानापन मऽ रंग जमावय
बुड्ढापन मऽ बकरी को कान।
उत्तर- पलाश के फूल

सिरपुर को राजा, कानपुर मऽ भाग्यो
हतपुर मऽ पकड़्यो, नखपुर मऽ मार्यो।
उत्तर- जूँ (जीव)

बाटी भर राई, घर-भर फैलाई।
उत्तर- तारे

एक थाल मोती से भरा
सबके सिर पर उल्टा धरा।

बताओ नऽ बाई
या आई वा गई।
उत्तर- दृष्टि (नजर)

काकी का ते कान हय
काका का कानच नहाय।
उत्तर- कढ़ाई/तवा

हात सी छूटी
भोबाय उठी।
उत्तर- परात (ठाठी)

चार भाई चार रंग
फूल खिलय एक रंग
उत्तर- पान के पत्ते, पान से ओठ लाल होना