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पाँच सुपारी बाँटु री, अब नेवतब कुल-परिवार, लालजी के मूरन हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

पाँच सुपारी बाँटु[1] री, अब नेवतब[2] कुल-परिवार, लालजी के मूरन हे।
पाँच सुपारी बाँटु री, मोरे अलख हुलरुए[3] के मूरन हे॥1॥
अब बम्हना बसे जे बनारस, अब हजमा कुरखेत[4] लालजी के मूरन हे।
ए सवासिन[5] बसे ससुर घर, अब किन[6] रे परिछेबाल[7] लालजी के मूरन हे॥2॥
अब बम्हना के चिठिया पेठाइय, अब हजमा के पकरि मँगाइय, लालजी के मूरन हे।
ए सवासिन के डोलिया फनाइय[8] उहे रे परिछेबाल, लालजी के मूरन हे॥3॥
नव मन गेहुँमा[9] मँगाइय, अब नेवतब कुल परिवार, लालजी के मूरन हे।
नव मन घिआ[10] मँगाइय, अब नेवतब कुल परिवार, लालजी के मूरन हे॥4॥
नव थान[11] कपड़ा मँगाइय, हम नेवतब सब परिवार, लालजी के मूरन हे।
पहिला अस्तुरा नउआ फेरिय, हमर लाल उठल छिहुलाय[12] लालजी के मूरन हे॥5॥
दूसरा अस्तुरा नउआ फेरिय, हमर लाल उठल छिहुलाय, लालजी के मूरन हे।
तीसरा अस्तुरा नउआ फेरिय, हमर लाल उठल छिहुलाय, लालजी के मूरन हे॥6॥
चउथा[13] अस्तुरा नउआ फेरिय, हमर लाल उठल छिहुलाय, लालजी के मूरन हे।
हजमा के लुलुहा[14] कटाइय, नउनिया के देहु बनवास, लालजी के मूरन हे॥7॥
पँचमा अस्तुरा नउआ फेरिय, हमर लाल उठल छिहुलाय, लालजी के मूरन हे।
हजमा के सोनवा गढ़ाइय, नउनिया के लहरापटोर[15] लालजी के मूरन हे॥8॥

शब्दार्थ
  1. बाँटो
  2. न्योता दूँगी, निमंत्रित करूँगी
  3. दुलारा
  4. कुरुक्षेत्र
  5. परिवार की लड़कियाँ, बहन, बेटी आदि
  6. कौन
  7. परिछनेवाली। मुंडन, उपनयन और विवाह संस्कार के अवसर पर स्त्रियों द्वारा किसी द्रव्य को हाथ में लेकर बच्चे या दुलहे के माथे से छुआकर सम्पन्न किया जाने वाला एक लोकाचार को परिछन कहते हैं।
  8. पालकी पर चढ़ाकर ले जाना
  9. गेहूँ
  10. घृत
  11. लगभग
  12. दर्द से बेचैन होकर चौंक उठना
  13. चतुर्थ
  14. कलाई तक का भाग
  15. गोटा-पाटा जड़ी रेशमी साड़ी