भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पिया बाज पियाला जाए ना / क़ुली 'क़ुतुब' शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पिया बाज पियाला जाए ना
पिया बाज यक तिल जिया जाए ना

कही थे पिया बिन सुबूरी करूँ
कहया जाए अम्मा किया जाए ना

नहीं इश्क़ जिस दो बड़ा कोड़ है
कर्धी उस से मिल बे-सिया जाए ना

‘क़ुतुब’ शह ने दे मुज दिवाने को पंद
दिवाने कूँ कुच पंद दिया जाए ना