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प्यार में कुछ भी नहीं छिपाना चाहिए / विमल कुमार

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जब कोई आदमी
करता है किसी से
सच्चा प्यार
तो सब कुछ बताना चाहता है

आसमान का रंग
इस समय कैसा है
कैसी हो रही है बारिश
अचानक उसके शहर में
कितनी उल्लसित हैं तरंगें
समुद्र में
कितना-कितना गर्जन
कितनी गहरी है रात
कितनी उदासी

वह अपनी हर ख़ुशी
बताना चाहता है
जब उड़ी आसमान पर पतंगें उसकी
तो वह इस ख़ुशी को फ़ौरन
एक संदेश की तरह चाहता है भेजना
यहाँ तक कि उसके घर के सामने
तार पर बैठी हो कोई चिड़िया
तो वह भी बताना चाहता है
चाहता है यह भी बताना
आज उसके आँगन में एक फूल खिला है
धूप निकली है बहुत दिनों के बाद
पार्क में

हालाँकि कुछ लोग यह भी
कहते हैं इसमें बताना क्या है
क्या नहीं है उसे मालूम
पर जब आदमी करता है
किसी से सच्चा प्यार
तो आटे दाल और
सब्ज़ियों के दाम भी
चाहता है बताना
किस तरह बढ़ गई है महंगाई
और प्याज“ के भाव
चढ़ गए आसमान पर

उफ! यह ट्रैफ़िक जाम
किस तरह झर रहा है पलस्तर
दीवार पर चल रही है
एक छिपकली
किस तरह जर्जर हो गया है
यह मकान
बढ़ गया है कितना
किराया
और स्कूल की फ़ीस

वह खाने के स्वाद
पानी का रंग
मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू
भी बताना चाहता है
अपने समय की राजनीति
और दुष्चक्र तो ज़रूर ही
झूठ और सच के भेद को भी
फ़’रेब को भी
बताना चाहता है

बताना चाहता है
कोई गाना
किस तरह उसके दिल को छू गया एक दिन
पर यह भी बताना चाहता है
नौकरी करता किस तरह घुट-घुटकर
इन दिनों
और नहीं मिल पा रही
समय पर
तनख़्वाह....

वह यह भी बताना चाहता है
उसके मन में है
किस तरह की है गुत्थियाँ
किस तरह की उलझनें
किस तरह से विचलन-आकर्षण
वह अपनी कमज़ोरी या कमी को बताए
बताए अपने लालच
यह घृणा को
तो समझिए
वाकई वह प्यार करता है
आपसे सच्चा

अगर वह आदमी
नहीं बताना चाहता है
तो समझो वह कुछ
छिपा रहा है
सच्चा प्यार
करना है
तो किसी को
अपने पुण्य और पाप भी बताने चाहिए

प्यार में कुछ भी नहीं छिपाना चाहिए
अगर वह किसी और से प्यार करने लगा है
तो यह बात उसे सबसे पहले बतानी चाहिए
जितना पारदर्शी होगा प्यार
उतना ही होगा वह
मज़बूत
और तूफ़ान में भी वह टिकेगा
हरदम

कोई ताक़’त
नहीं हिला सकती उसे ।