भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रभुजी तोकह लाज हमारी / धरनीदास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्रभुजी तोकह लाज हमारी।
नीलकंठ नरहरि नाराइण, नील बसन बनवारी।
परम पुरख परमेस्वर स्वामी, पावन पउन अहारी।
माधव महाजोति मध-मरदन, मान मुंकंद मुरारी।
निर्विकार निरजुर निंद्रासिवन, निर्बिख नरक निवारी।
कृपा सिंधु कालत्रैदरसी, कुकृत-प्रनासन-कारी।
धनुर वान-धृत मान धराधर, अनिविकार असिधारी।
हौं मतिमंद चरन सरनागत, करन गहि लेहु उबारी।