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बजैए उत्सव / जीवकान्त

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गामक कलाकार बिलहैए प्रेमस सनेस
दू गोटे छोटकी शहनाइ फुकैए
दू गोटे छोट-छोट डिग्गी पिटैए
बसातमे ओलड़ि-ओलड़ि खसैए सिनेह
बजैए उत्सव
आत्मसमर्पणक सुख होइए फड़िच्छ
प्रियक आँजुरमे
फूल भए खसि पड़बाक लिलसा
गमगम करैए
जगह छैक प्रेम लेल
फैल जगह छैक
अपन संपूर्ण जीवन पोखरिकें आँजुरसँ उपछि दियौ
थोड़बा भिजै छै
तृप्त होइछै एक अंश
जुड़एबा लेल बचै छै जगह
देखाइ छै खाली जगह बहुत
बुढ़बा बजनियाँ ने तकैत अछि ने मुनैत अछि आँखि
ने कान खोलने अछि ने मुनने अछि
बामा हाथें डुग्गी पर दैए थाप डिग-डिग
दहिना हाथें लकड़ीसँ ठोकैए चामकें डुग-डुग
ओ मिलओने अछि मोरियासँ हाथमे हाथ
कानसँ कान एक कएने अछि
ओ हाथसँ नहि
अपन रोइँ-रोइँसँ बहार करैए डुग्गी क आवाज
ओकर नस-नसमे प्रवाहित लाल-करिछोन रक्त
डुग्गी पर आघात कए
रचैए आत्म-निवेदनक संगीत
शहनाइ आ डुग्गी बजैए
मनुक्खक मोनक कथा कहैए
पूरा कहि नहि पबइए
पूरा कहबा लेल बजबए पड़तैक सय बर्ख आर
हजार बर्ख आर
डिग-डिग, डिग-डिग....