भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बदरा पानी दे ! / रमेश रंजक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

(छोटे खेतिहर बालक की पुकार)

पास नहीं है बैल -- बदरा पानी दे !
ज़ालिम है टूवैल -- बदरा पानी दे !

इज़्ज़तदार ग़रीब पुकारे
ढोंगी मारे दूध-छुआरे

चटक रही खपरैल -- बदरा पानी दे !

इतने ठनगन दिखा न भाई
खबसूरत औरत की नाँई

तू भी हुआ रखैल -- बदरा पानी दे !

छोड़ पछाँही लटके-झटके
एक बार नहला जा डट के

तू ! ग़रीब की गैल -- बदरा पानी दे !

ऐसी झड़ी लगा दे प्यारे
भेद-भाव मिट जाएँ हमारे

छूटे सारा मैल -- बदरा पानी दे !