भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बदलाव / सुधा ओम ढींगरा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


सूखे पत्तों को
उड़ते देख
ऋतु ने
प्रश्न किया--
क्या तुम्हें
मेरे साथ की
इच्छा नहीं रही?

पत्तों ने कहा--
हम तो
बूढ़े,
बेकार
हो गए.
सोचा,
क्यों ना
बिखर कर
राख हों जायें.

इसी
बहाने
अपनी जननी से
मिलने की ललक
पूर्ण हो जाए.

शायद
उसके
नव प्रजन्न में
सहायक हो सकें.

सुनते ही
ऋतु भी
इठलाती
रंग बदलने लगी.