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बधाये नन्द के घर आज सुहाये नन्द के घर आज / बुन्देली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बधाये नन्द के घर आज, सुहाये नन्द के घर आज।
टैरो टैरो सुगर नहनिया, घर-घर बुलावा देय
बधाये...
अपने-अपने महलिन भीतर, सब सखि करती सिंगार
पटियां पारे, मांग संवारे, वेंदी दिपत लिलार।
बधाये...
आवत देखी सबरी सखियां, झपट के खोले किवाड़
बूढ़न-बड़ेन की पइयां पड़त हूं, छोटेन को परणाम।
बधाये...
बाबा नन्द बजारे जइयो, साड़ी सरहज खों ले आओ
पहिनो ओढो सबरी सखियां, जो जी के अंगे भाये।
बधाये...
पहिन ओढ़ ठांड़ी भई सखियां, मुख भर देतीं आशीष
जुग-जुग जिये माई तेरो कन्हैया, राखे सभी को मान।
बधाये...