भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बना घोंसला पिंजरा पंछी / जानकीवल्लभ शास्त्री

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बना घोंसला पिंजरा पंछी !

अब अनंत से कौन मिलाये
जिससे तू खुद बिछड़ा पंछी !

सुखद स्वप्न लख किसी सुदिन का
चुन-चुन पल-छिन तिनका-तिनका
रहा मूल से दूर-दूर, पर --
डाल-पात तो झगड़ा पंछी !

अग्नि जले तब विफल न इंधन
मुक्ति करम का मर्म, न बंधन
उड़ा हाय !जो सबसे आगे
वह अपने से बिछड़ा पंछी