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बन्दर जी ने सोची ब्याह की / दीनदयाल शर्मा

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बन्दर जी ने देखी बन्दरिया
सोचा ब्याह रचाऊँ
बोला, गाजा-बाजा लेकर
बरात अपनी लाऊँ ।

बोली बन्दरिया स्वागत सबका
धूमधाम से आओ
बिना दहेज गर करोगे शादी
दुल्हन मुझको पाओ ।।