भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बसंत गीत-1 / राजकुमार

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सखि मँजरैलोॅ अमुआ रोॅ डार, कोइलिया कूक मारै
बड़ी अल्हड़ बसंती बयार, कोइलिया कूक मारै

ललियैलोॅ पल्लो रोॅ, पल्ला उघारै
भिंजलोॅ चुनरिया के, चुगला निहारै
लहरचुट्टी रोॅ लगलोॅ कतार, कोइलिया कूक मारै
बड़ी अल्हड़ बसंती बयार, कोइलिया कूक मारै

मदिरैलोॅ महुआ रोॅ, अलमातो अँगिया
अलसैलोॅ अँखिया छै, पीबी के भँगिया
लहस लचकै छै लेमुआँ-अनार, कोइलिया कूक मारै
बड़ी अल्हड़ बसंती बयार, कोइलिया कूक मारै

लाल-लाल फुलबा सें, सजलोॅ सिमरबा
लहरै छै टेसू रोॅ टुह-टुह अँचरबा
गगन चूमै अगन कचनार, कोइलिया कूक मारै
बड़ी अल्हड़ बसंती बयार, कोइलिया कूक मारै

गदरैलोॅ मौसम रोॅ, गजुरैलोॅ मनमाँ
चम्पा-चमेली सें, चहकै ऐंगनमाँ
बूढ़ोॅ वर पर भी चढ़लोॅ सिंगार, कोइलिया कूक मारै
बड़ी अल्हड़ बसंती बयार, कोइलिया कूक मारै