भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

बिल्ली मौसी / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बिल्ली मौसी रुसली जाय
कैन्हें कोय्यो कहै बिलाय
बिल्ली मौसी रातकोॅ रानी
बिल सें लै मूसोॅ केॅ टानी।

होना ई कम नै खूंखारिन
आधोॅ-आधोॅ छेकै बाघिन
दूध-दही के ताकोॅ में
मौसी रहै फिराकोॅ में।