भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भाव-कलश (ताँका-संग्रह) / भावना कुँअर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 

डॉ0 भावना कुँअर की संवेदना निराली है । अपने गाँव के नीम के पेड़ की निबौंलियों को अपनी यादों के आईने में देखती है -

नीम का पेड़
बहुत शरमाए
नटखट-सी
निबौंलियाँ उसको
खूब गुदगुगाएँ

तो उन्हें कहीं आँगन में खेलती धूप में माँ अनाज सुखाती दिखाई देती है ;जिसमें कबूतरी का समावेश उसे मार्मिक बना देता है-

आज फिर माँ
अनाज़ सुखाएगी
वो कबूतरी
पल भर में सब
चट कर जाएगी

भावना जी के ताँका का हर एक शब्द पाठक के मर्म को छू लेता है । जीवन भर हर एक व्यक्ति किसी न किसी अभाव से व्यथित रहता है ; सम्भव: यही जीवन का सत्य है-

 
आँसू गठरी
खुलकर बिखरी
हर कोशिश
मैं समेटती जाऊँ
पर बाँध न पाऊँ

इन पंक्तियों की व्यापकता देशकाल की सीमाओं से परे हर इंसान की नब्ज़ पर हाथ रखती है।