Last modified on 6 मार्च 2017, at 12:36

भैणाँ मैं कत्तदी कत्तदी हुट्टी। / बुल्ले शाह

भैणाँ मैं कत्तदी कत्तदी हुट्टी<ref>थक गई</ref>।
पीहड़ी पिच्छे पिछावाड़े रहि गई,
हत्थ विच्च रहि गई जुट्टी।
अग्गे चरखा पिच्छे पीहड़ा,
मेरे हत्थों तन्द तरूटी<ref>टूटी</ref>।
भैणाँ मैं कत्तदी कत्तदी हुट्टी।

दाज जवाहर असाँ की करना,
जिस प्रेम कटवाई मुठ्ठी।
उहो चोर मेरा पकड़ मंगाओ,
जिस मेरी जिन्द कुट्ठी।
भैणाँ मैं कत्तदी कत्तदी हुट्टी।

भला होया मेरा चरखा टुट्टा,
मेरी जिन्द अजाबों छुट्टी।
बुल्ला सहु ने नाच नचाए,
ओत्थे धुम्म कड़ कुट्टी<ref>डंके की चोट</ref>
भैणाँ मैं कत्तदी कत्तदी हुट्टी।

शब्दार्थ
<references/>