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मन का सोया हुआ विश्वास जगाना होगा / ज्ञान प्रकाश विवेक

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मन का सोया हुआ विश्वास जगाना होगा
इस अँधेरे में दीया ढूँढ के लाना होगा

वो जो बन जाए चुनौती तेरे पैरों के लिए
ऐसा बीहड़ तुझे क़दमों में बिछाना होगा

जो फ़क़ीरों की तरह फिरते हैं सूखे पत्ते
उनका परखा हुआ यह सारा ज़माना होगा

ओस की बूँद में जिस तरह किरण बैठी है
क्या कभी इस तरह मेरा भी ठिकाना होगा

जिसने चिरवा के दरख़्तों को बना दीं कड़ियाँ
वो मेरे दौर का साहूकार सयाना होगा

न कोई पेड़ यहाँ है न कोई साया है
अपनी परछाई को पैरों में सजाना होगा