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महुआ-गीत / सरयू सिंह 'सुन्दर'

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बगिया में बोले कोइलिया हो, भइले भिनुसार।
बीनेली महुआ चँगेलिया हो, सखिया सुकुमार।।
दूर असमनवा में सुकवा उगल बा, गते-गते होता अँजोर ;
बड़की बगइचा में बोले पपिहरा, बनवा में बोलेला मोर।
रसे-रसे डोले मछुलिया हो, पुरवा के बयार।। बगिया....
गछिया से टप-टप महुआ चुएला, जइसे नयनवा से लोर। बगिया....
महुआ के गछिया मातल मलिनिया, मनवा में उठेला हिलोर।
जोतवा से चमकल धरतिया हो, मुरझाइल अन्हार।। बगिया....

गोरी के लिलरा चमके टिकुलिया, जैसे बिजुरिया सजोर ;
नयना में कजरा उड़ेला अँचरा, मारे झुलनिया झकोर।
सजनी के अइसन बचनिया हो, जैसे रिमझिम फुहार| बगिया....
मनवाँ हमार बसे एही सुनसनवा, अमवा-महुअवा के छाँव ;
बगिया-बगइचा में बाटे सरगवा, झोपड़ी-झोपड़ी के गाँव,
मनवा में बाटे पीरीतिया हो, बनवा मे बहार। बगिया....