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मां / श्याम महर्षि

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मां थारै पगां कनै
बैठ‘र
बातां करयां नैं
बीतग्या बरसां रा बरस
न थे कीं कैयो
न म्हैं कीं पूछ्यो थांनैं
कै कांई हाल-हुवाळ है थांरा।

मां टाबर पणै मांय
अलेखूं बातां रा सवाल
पूछतो थानै
अर थे बिना उथळ्यां
देंवता रैया जवाब।

मां फेरू ई
थे
न कीं पूछ्यो
अर न कीं
कैयो म्हनैं।