भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

माघ महिनवा / सरोज सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सखी! माघ महिनवा अमवा मउराला
देख त कईसन सवनवा बउराईल
अब हम फगुआ के फाग सुनाईं
के असो बईठ के कजरी गाईं
मारsता करेजवा में जोर हो रामा, माघ के महिनsवा
सखी,माघ महिनवा सरसों पियराला
देख त कईसन इ,घाटा घिर आईल
 अब हम आपन खेत सरियाईं
के सरसों के फर फरीयाईं
भीजsता अचरवा के कोर हो रामा, माघ के महिनsवा
सखी, माघ महिनsवा के घाम सोहाला
देख त कईसन झटास भर आईल
कैसे सुरुज के हम जलवा चढाई
कैसे फूलगेंदवा के झरला से बचाईं
देहिया सिहराला पोरे पोर हो रामा, माघ के महीनsवा