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माटी कोड़े गेली हम आज मटिखनमा / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

माटी कोड़े गेली[1] हम आज मटिखनमा[2]
इयार[3] मोरा पड़लन, हाय जेहलखनमा[4]॥1॥
पियवा के कमइया[5] हम कछु न जान ही।
इयार के कमइया नकबेसर[6] हुई[7] हे ननदो[8]॥2॥
ओही नकबेसर धरी इयार के छोड़यबो[9]
इयार मोरा पड़लन हाय जेहलखनमा॥3॥

शब्दार्थ
  1. गई
  2. मिट्टी वाली खान, जिस खान गढ़े से मिट्टी निकाली जाती है
  3. यार, प्रेमी
  4. जेलखाना, कारागृह
  5. कमाई, उपार्जन
  6. नाक में पहना जाने वाला एक आभूषण
  7. है
  8. ननद पति की बहन
  9. छुड़ाऊँगी।