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माना की लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ / सलीम रज़ा रीवा

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माना की लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ
शामिल है जिंदगी में मगर ग़म सभी के साथ

आएगा मुश्किलों में भी जीने का फ़न तुझे
कूछ दिन गुज़ार ले तू मेरी मुफ़लिसी के साथ

नाज़ो अदा के साथ कभी शोखिओं के साथ
दिल में उतर गया वो बड़ी सादगी के साथ

ख़ूने जिगर निचोड़ के रखते हैं शेर में
मुझको बहुत है प्यार मेरी शायरी के साथ

आसानियां रहीं कभी दुश्वारियां रहीं
मौसम के पेंचो ख़म भी रहे ज़िंदगी के साथ

उसपे ना एतबार कभी कीजिए "रज़ा"
धोखा किया है जिसने हर एक आदमी के साथ.