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माना बेरंग ज़िन्दगानी है / सिया सचदेव

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माना बेरंग ज़िन्दगानी है
उम्र हर हाल में बितानी है॥

इश्क़ में और कुछ नहीं दरकार
ज़ख्म पाना हैं चोट खानी है॥

हुस्न पर इस क़दर ग़ुरूर है क्यूँ
याद रख्खो यह जिस्म फ़ानी है॥

भीगा मौसम है अब तो आ जाओ
देखो फसलों का रंग धानी है॥

उनके कूचे से होके आई :सिया:
यह हवा इस लिए सुहानी है॥