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मानो मेरी आज ये, बात मानने योग / गंगादास

मानो मेरी आज ये, बात मानने योग ।
साऊ ना दुश्मन कोई, सब कर्मों के भोग ।।

सब करमों के भोग भोग देके जाता है ।
बिन भुगते ना नास होय आगे आता है ।।

गंगादास संसार खेल सपने का जानो ।
साऊ दुश्मन भेद भरम से मिथ्या मानो ।।