मानो मेरी आज ये, बात मानने योग ।
साऊ ना दुश्मन कोई, सब कर्मों के भोग ।।
सब करमों के भोग भोग देके जाता है ।
बिन भुगते ना नास होय आगे आता है ।।
गंगादास संसार खेल सपने का जानो ।
साऊ दुश्मन भेद भरम से मिथ्या मानो ।।
मानो मेरी आज ये, बात मानने योग ।
साऊ ना दुश्मन कोई, सब कर्मों के भोग ।।
सब करमों के भोग भोग देके जाता है ।
बिन भुगते ना नास होय आगे आता है ।।
गंगादास संसार खेल सपने का जानो ।
साऊ दुश्मन भेद भरम से मिथ्या मानो ।।