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मान कै बैठी है प्यारी 'प्रवीन' / प्रवीणराय

मान कै बैठी है प्यारी 'प्रवीन' सो देखे बनै नहीं जात बनायो।
आतुर ह्वै अति कौतुक सों उत लाल चले अति मसेउ बढ़ायो॥
जोरि दोऊ कर ठाढ़े भये करि कातर नैन सों सैन बतायो।
देखत बेंदी सखा की लगी मित हेरयो नहीं इत यों बहरायो॥