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मालिक है सच में वही / त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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मालिक है सच में वही, जो भोगे, दे दान।
धन जोड़े, रक्षा करे, उसको प्रहरी मान॥
उसको प्रहरी मान, खर्च कर सके न पाई।
हर क्षण धन का लोभ, रात दिन नींद न आई।
'ठकुरेला' कविराय, लालसा है चिर-कालिक।
मेहनत की दिन रात, बने चिंता के मालिक॥