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मीठी बातें / त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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मीठे ­ मीठे बोल सुनाती,
फिरती डाली ­ डाली।
सब का ही मन मोहित करती
प्यारी कोयल काली ॥

बाग­ बाग में, पेड़­ पेड़ पर,
मधुर सुरो में गाती।
रुप नहीं, गुण प्यारे सबको
सबको यह समझाती॥

मीठी ­ मीठी बातें कहकर
सब कितना सुख पाते।
मीठी ­मीठी बातें सुनकर
सब अपने हो जाते॥

कहती कोयल प्यारे बच्चो!
तुम भी मीठा बोलो।
प्यार भरी बातों से तुम भी
सब के प्यारे हो लो॥