भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मेंढक राजा / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

टर-टर करते मेंढक राजा
को सूझी शैतानी,
फेंक दिया हाथी के ऊपर
एक दिन गंदा पानी।

हाथी ने फिर चकरी जैसा
उसको खूब नचाया,
चक्कर खाकर मेंढक बोला-
‘अरे, बचाओ भाया!’