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मेरे गीत मौन मत होना / रामेश्वरलाल खंडेलवाल 'तरुण'

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चिर दरिद्र सा जीवन-पथ पर,
भटकूँ जब ले काया जर्जर,
तब तुम आ उर की प्राची से, बरसाना ऊषा का सोना!
हों रस-हीन दिशाएँ सारी,
उजड़ चले जीवन-फुलवारी,
तब तुम बरस जलद से रिमझिम, मधु से मेरे प्राण भिगोना!
चरण चाल में बनना सरगम,
देना कंठों को स्वर पंचम-
जब जग-जीवन-भार अकेले पड़े विश्व में मुझको ढोना!

तुझ पर प्यार अपार रहा है,
आजीवन अधिकार रहा है-
इस धरती पर, जिस पर अब तक कण भर मेरा हुआ, न होेना!

जब संसार व्यथाओं वाला-
हो जाये काजल-सा काला,
चन्द्र-किरण बन आलोकित कर देना शून्य हृदय का कोना!

मेरे गीत मौन मत होना!