भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मेरे मुरगे / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा
मेरे मुरगे कुकुडूँ कूँ
उड़कर मुझसे दूर न जा

मेरे मुरगे के सिर पर
कलंगी है कितनी सुंदर
कितनी सुंदर पाँखें हैं
देखो तो इनको छूकर

मेरे मुरगे कुकुडूँ कूँ
कुकुडूँ-कुकुडूँ गीत सुना
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा

मुरगा है यह बड़ा बली
सुंदर रंगरँगीला है
भूरी-भूरी पाँखें हैं
सिर पर बिलकुल पीला है

मेरे मुरगे ठुमुक-ठुमुक
अपना सुंदर नाच दिखा
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा

साथ रहेंगे अब हम-तुम
साथ-साथ मैं खेलूँगा
तुम कुकुडूँ कूँ-कूँ करना
मैं गोदी में ले लूँगा

बैठा दूँगा तुझे वहाँ
जहाँ बड़ा गुड्डा रक्खा
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा।