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मेलजोल / सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर'

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रोज-रोज नूनू स्कूल जो
जेहा जुड़ै, मिलीजुली खो,
खैला सेॅ पहिने हांथ-मू धो,
नो सं पहिने कहियो नै सो,
आपनों सेॅ बड़का केॅ कहिहऽ हो,
रोज-रोज नूनू स्कूल जो।

खोड़ा-पहाड़ा करिहऽ याद,
ओन-पानी नै करऽ बरवाद,
घोर-दुआर केॅ बोढ़ी-सोढ़ी,
फेकऽ खेत मं समझी खाद,
समय मिलं तेॅ, माल-जाल कं,
सानी-पानी भूस्सा, दीहऽ नाद।

नै करिहऽ साथी सेॅ झगड़ा,
वे मतलव नै लीहऽ रगड़ा,
पढ़ी-लिखी केॅ बनिहऽ तगड़ा।