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मैं तो जीता हूँ यार अब पल में / सुरेन्द्र सुकुमार

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मैं तो जीता हूँ यार अब पल में।
मेरा भरोसा नहीं है अब कल में।

अभी आए हो अभी बैठे हो,
बात न हो पाई तेरी चल-चल में।

ऊपर दिखता वो तो कूड़ा है,
सच्चे मोती तो यार हैं तल में।

कर्म करना ही है तेरे बस में,
डूब मत अब यार तू फल में।

प्रश्न ही प्रश्न, प्रश्न ही प्रश्न हैं यारो,
कोई उलझा नहीं है अब हल में।