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म्हारै गाँव रा दूहा / मानसिंह शेखावत 'मऊ'

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कठै गई गट्टा री ताशां , कठै गई गणगोर !
नितकी मेळा लागता , अर ऊँटां री दौड़ !!1!!

बैठ झरोकै झाँकता , ठाकर पूरण सिंग !
कद-काठी सूं लागता , ज्यूँ जैपर रा किंग !!2!!

खेत-खळां की होवती , रोजीनां की राड़ !
सींव-हळाई दाबता , कै सरकाता बाड़ !!3!!

मझ गरम्यां मैं लागती , छान-झूंपड़ां लाय !
नाज-पात पीसा-टका , ओर बंध्योड़ी गाय !!4!!

जात-पांत नीं देखता , सगळा आता दोड़ !
चढ़ता ळ चेळ कर , आळ्यो देता फोड़ !!5!!

पारबती पाणी भरै , मंगळ्यो गातो गीत !
बोटां मैं सोटा पड़्या , गयो भायलो जीत !!6!!

मोती बाबो ऊठतो , लोग मिलाता टेम !
चाहे सी'ळी बाजती , नित न्हाणै रो नेम !!7!!

होळी पर चंग बाजता , दूहा देता जाट !
रीतां सगळी टूटगी , होग्यो सम्पटपाट !!8!!

डूडू मैं मल खेलता , भांत-भांत रा दांव !
भाई भेळा होवता , सजधज आता गाँव !!9!!

फौजां सूं जद आवता , बै फागणियां बींद !
चोबारै चढ़ सोवता , चोखी आती नींद  !!10!!

बकरा नितकी बाढ़ता , पी-पी करता फ़ैल !
धोकर सारो काढता , बार-तिंवारां मैल !!11!!

आजादी री छाँव मैं , गै'रौ कर्'यो विकास !
हेत-हताई भूलगा , भूल्या निज इतिहास !!12!!