भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

यह कैसी ज़िद है / दिविक रमेश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यह कैसी ज़िद है महाप्रभु
कि जो मिलना ही चाहिए
उसे भी माँगू
और वह भी फैलाकर हाथ
गिड़गिड़ाकर
नाक रगड़कर।

क्यों?

यह कैसी ज़िद है महाप्रभु
जिसे देना ही होगा आपको
उसे भी रोक रहे हैं
और खप रहे हैं।

क्यों?

यह कैसी ज़िद है महाप्रभु
कि जिसे आप विवश हैं देने को
उसी को नहीं दे पा रहे हैं
खुद को मसोस रहे हैं

क्यों?

कृपया इसे व्यंग्य न समझें महाप्रभु

क्योंकि कमजोर नहीं हूँ
मैं।