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यह / फ़ेर्नान्दो पेस्सोआ / अशोक पाण्डे

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वे कहते हैं
जो कुछ मैं लिखता हूँ वह दिखावा या झूठ होता है
ऐसा कुछ नहीं है।

सीधे-सीधे यह है
कि मैं कल्पना के माध्यम से महस्य़्स करता हूँ
मैं दिल के साज का इस्तेमाल नहीं करता
मैं जो कुछ सपने में देखता हूँ
या जो कुछ हार जाता हूँ
जिससे मुझे धोखा मिलता है
या जो मुझ पर मर जाता है
वह एक छज्जे जैसा होता है
दूर किसी और चीज़ को देखता हुआ।

इसी बात ने मुझे आगे बढ़ाया है,
इसीलिए मैं उन चीज़ों के बीच लिखता हूँ
जो मेरे पैरों के आसपास नहीं होतीं
जो मेरे अपने गड़बड़झाले से मुक्त होती हैं
उसके वास्ते चिन्तित रहता हूँ, जो नहीं है
अहसास?
उसे पढ़ने वाले को करने दो !

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अशोक पाण्डे