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याद रहेगा कालखण्ड यह / कैलाश मनहर

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एक

याद रहेगा कालखण्ड यह
कैसे भूल पाएँगे आख़िर झूठ और पाखण्डीपन हम
लोकतन्त्र के नाम रचा था जो शासक ने
सत्ता में आने से पहले जाने क्या-क्या
स्वप्न दिखाए परिवर्तन के
भ्रष्टाचार ख़त्म करने का वचन दिया था
और नियन्त्रण में करना था महँगाई को
रुपये का था मूल्य उठाना थोड़ा ऊपर
सबको लेकर साथ
नियोजित करना था विकास भी सबका
और देश को ले जाना था प्रगति-पथ पर
किन्तु हाय रे !
न तो भ्रष्टाचार मिटा, न रुपया उठ्ठा
बल्कि और भी ज़्यादा हो गई हालत पतली
पैट्रोल की क़ीमत बढ़ती रही दिनो-दिन
नागरिकों में भेदभाव भी साफ़ दिखा और
गुण्डागर्दी लगी पनपने खुलेआम अब
याद रहेगा कालखण्ड यह

दो

याद रहेगा कालखण्ड यह
नोटबन्दी में मची किस तरह त्राहि-त्राहि
कैसे बदला धनपतियों ने काला धन अपना सफ़ेद में
कैसे मज़दूरों के धन्धे बन्द हुए और
छोटे व्यापारी सब बेरोज़गार हो गए
जी०एस०टी० के चक्कर में फँस गए बेचारे
और किसानों को फ़सलों का
सही मूल्य भी नहीं मिल सका
नौजवान सड़कों पर लगे भटकने दिनभर
दलितों पर तो अक्सर अत्याचार हुए ही
अल्पसँख्यकों को तो स्पष्ट देशद्रोही ही मान लिया और
गौ-गुण्डों ने जिसको चाहा मारा-पीटा
ऊपर से वक्तव्य मन्त्रियों के सारे ही आग लगाऊ
डर-डर कर जीने की है लाचारी जैसे
अपना देश पराया हो गया, हाय-हाय रे !
काट रहे दिन-रात लोग डर-डरकर अपने
शासन बना हुआ है बन्धक धनपतियों का
आमजनों का जीवित रहना भी मुश्किल है
इसी अन्धेरे और ज़ुल्म के कारण सबको
याद रहेगा कालखण्ड यह

तीन

याद रहेगा कालखण्ड यह
तर्क और वैज्ञानिक चिन्तन प्रतिबन्धित हैं
रहन रखा है धर्मान्धों के पास ज्ञान सब
और विवेक की बातें सारी अर्थहीन हैं
मटियामेट किया जाकर इतिहास समूचा
गड़बड़झाला अन्धास्थाएँ हावी हैं अब
पढ़ना-लिखना हुआ जा रहा सभी निरर्थक
भक्ति-योग है आवश्यक शिक्षित होने को
शिक्षण-संस्थानों में हस्तक्षेप हो रहा खुल्लमखुल्ला
भेदभाव कर रहा राज्य है अल्पसँख्यकों और
दलित छात्रों पर अक्सर होता है जो
अत्याचार पता है सबको किन्तु सभी चुप
राज्य प्रताड़न के भय से हैं विवश करें क्या
जबकि कर रहे तोड़-मरोड़ तथ्यों में भारी
पूर्वाग्रह से ग्रस्त पल रहे हैं झूठे पण्डित सरकारी
बदल रहे इतिहास देश का लाँछित करते
पूर्वजों के किए-धरे को कर अमान्य जो
कायर और समझौतावादी लोगों को घोषित करते हैं
स्वतन्त्रता के सेनानी झूठे दावों से
भुला रहे हैं मूल समस्या आमजनों की
युवा वर्ग को उन्मादी जो बना रहे हैं
विश्वविद्यालय प्राँगण में भी पुलिस-फौज़ से
फैलाते आतँक और आरोप लगाते हैं छात्रों पर
देशद्रोह का मिथ्यावादी जबकि आचरण स्वयँ कर रहे
जनद्रोही वे बैठे हैं सत्ता के भीतर
शिक्षा के गिरते स्तर के लिए हमेशा सजग व्यक्ति को
याद रहेगा कालखण्ड यह

चार

याद रहेगा कालखण्ड यह
जबकि धर्म को राजनीति का शस्त्र बनाकर
शासक स्वयँ फर्क़ करता है आमजनों में
फूट डाल कर नफ़रत फैलाता समाज में
पीट-पीट कर हत्या करते हैं हत्यारे
और मन्त्रीगण बने पक्षधर हत्यारों का मान बढ़ाते
बहुसँख्यक हैं अल्पसंख्यकों पर हावी और
हरेक बात पर शासक दल के छली प्रवक्ता
विधर्मियों को देशद्रोह से आरोपित कर
राष्ट्रवाद के नाम स्वयँ को देशभक्त साबित करते हैं
रहन-सहन और संस्कृति अपनी श्रेष्ठ बताते
अन्यों को लाँछित करते हैं नाहक़ ही और
कभी गाय तो कभी बीफ का नाम लगाकर
चाहे जिसको मार-पीट दंगा फैलाते
मन्दिर तो जैसेकि विषय स्थाई ही है
जब भी उन्हें ज़रूरत होती छेड़ उसे मौक़ा मिलते ही
भड़काने को आग सदा तत्पर रहते हैं
ध्रुवीकरण कर के समाज को बाँट रहे हैं
ओह ! चुनाव की राजनीति का खेल घृणास्पद
खेल रहे हैं शासक-दल के नेता ख़ुद ही
कपटपूर्ण बातों से शासन हथियाकर वह अत्याचारी
सारे देश को कूट-जाल में फँसा रहा है
क्रूर-कपट और छल-छद्मों से
जन-मन को जो भ्रमित कर रहा है वँचक भारी
याद रहेगा कालखण्ड यह

पाँच

याद रहेगा कालखण्ड यह
जब धर्मान्ध बना वह शासक बातें करता है कबीर की
जिसके मन में ज़हर भरा है अन्धास्था का
बात-बात पर प्रतिशोधी तेवर दिखलाता है अक्सर
अपने भीतर के मनुष्य को मार चुका जो
वह जब भी विकास की बातें करता है तो डर लगता है
जाने किसको मारा जाएगा जल्दी ही अब
नक्सलवादी माओवादी या आतँकी
कहकर होगा एनकाउण्टर किसी भले मानुष का शायद
हरदम आशँका रहती है उसके प्रति अब
क्योंकि बहुत ही पतनशील आचरण रहा है
उसका और पूरे ही उसके दल विशेष का
वह शासक जब हाथ नचाकर गुर्राता है ज़ोर-ज़ोर से
देता हुआ ग़ालियाँ लगता है निकृष्टतम
सच को जो स्वीकार तनिक भी कर नहीं सकता
तोड़-मरोड़ कर बतलाता है झूठी बातें
शिक्षा में भी अन्धास्थाएँ शामिल करके पाठ्यक्रमों में
एक समूची पीढ़ी को जो नष्ट कर रहा
इस शासक की काली करतूतों के कारण
याद रहेगा कालखण्ड यह

छह

याद रहेगा कालखण्ड यह
भात-भात चिल्लाते मरते जाएँ बच्चे
बलात्कार को झेल रही स्त्रियाँ हर घड़ी
नहीं सुरक्षित छोटी बालिकाएँ भी लेकिन
शासक-दल के लोग पक्ष में
बलात्कारी के रैली करते हैं सड़कों पर
जबकि विश्व में सबसे ज़्यादा महिला-अत्याचारों का
दाग़ लगा है संस्कृति पर कुख्यात घिनौना
सभी तरफ़ से विकृत मानस के अपराधी
अपसंस्कृति को रोज़ बढ़ावा देते अपने
अविवेकी वक्तव्यों से हैं आग लगाते
बाँट रहा पूँजीपतियों को खेतों की ज़मीन
कौड़ियों के दामों पर ज़ुल्मी शासक
पुलिसबलों की बन्दूकों से ख़ाली करवा
छीन रहे हैं धरती प्राणों से प्यारी जो
जबकि आत्महत्या करते किसान हज़ारों
और शासक सब ज़िम्मेदारी बता विपक्ष की
बड़े मज़े से झूठ बोलकर धोखा देते
क्षय होती जाती है आत्मा सम्विधान की
और मनुष्यता की गरिमा भी नष्ट हो रही
स्वतन्त्रता भी ख़तरे में है आज हमारी
कवियो ! बुद्धिजीवियो ! जागो, लिखो सत्य सब
याद रहेगा कालखण्ड यह

सात

याद रहेगा कालखण्ड यह
सभी पुरानी धरोहरें गिरवी रखने और
बड़ी-बड़ी कम्पनियों और निगमों को बेचे जाने के
घृणित कारनामों के कारण कई दशकों तक
अर्थव्यवस्था सम्भल नहीं पाएगी देश की
जी०डी०पी० के झूठे आँकड़े बता रहे हैं
छोड़-छोड़ कर अर्थशास्त्री त्यागपत्र देते हैं सारे
दास बने हैं टी०वी० चैनल प्रिण्ट-मीडिया
सच कहने की हिम्मत नहीं है शेष किसी में
सब सत्ता से स्वार्थपूर्ति हित झूठ बोलते
राष्ट्रवाद का छद्मभूत सब को दिखलाकर
जनता को बरगला रहे सँचार-माध्यम
छिपा रहे सरकारी काली करतूतों को मिलीभगत से
ले विकास का नाम जँगलों को उजाड़ते
काट रहे लाखों पेड़ों को धनिकों के हित
जल स्रोतों पर कब्ज़ा करते निहित स्वार्थी
पूँजीवादी बर्बरता के घोर समर्थक शासक हैं ये
मानव अधिकारों के भक्षक ये हत्यारे
देश नहीं बिकने दूँगा कहते हैं पर
भीतर-भीतर सब संसाधन बेच रहे हैं चोरी-चोरी
बिकते और कमज़ोर हो रहे महादेश की
नष्ट हो रही संस्कृति और सभ्यता के कारण ही
याद रहेगा कालखण्ड यह