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ये दुखड़ा रो रहे थे आज पंडित जी शिवाले में / अदम गोंडवी

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ये दुखड़ा रो रहे थे आज पंडित जी शिवाले में ।
कि कम्प्यूटर कथा बाँचेगा ढिबरी के उजाले में ।

विदेशी पूंजी मंत्री जी की अय्याशी में गलती है,
ज़ह्र कर्ज़े का घुल जाता है मुफ़्लिस के निवाले में ।

सदन की बढ़ गई गरिमा 'छदामी लाल' क्या आए,
इमरजेन्सी में बंदी थे ये चीनी के घोटाले में ।

शब्दार्थ