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रंग उड़े रे गुलाल इना घर में / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

रंग उड़े रे गुलाल इना घर में
पाणी पड़े रे तुबार इना घर में
जई ने कीजो कचेरी बिठईया से
दफ्तर के लिखईया से
दाई ने बेग बुलावे इना घर में
दाई बुलाय जच्चा क्या फरमाव
हम घर नाको मोड़ाय इना घर में
जई ने किजो उना सार का खिलईया से
पांसा का जितईया से
सासू जी ने बेग बुलाव इना घर में
सासू बुलाय बच्चा क्या फरमाव
कुवर अटोला में झेले इना घर में
आप तो जच्चा रानी
लाल लई सूता, गोपाल लई सूता
हमखे लगाई दौड़ा-दौड़ इना घर में
जाय ने कीजो कंठी का पेरईया से
चौसर का निरखईया से
जेठाणी खे बेग बुलाव इना घर में
जेठाणी बुलाय जच्चा क्या फरमावो
म्हारा चखे कुंकू धराय इना घर में
जाई ने कीजो उन पागां का पेरईया से
पेचां का निरखईया से
देराणी खे बेग बुलाव इना घर में
देराणी बुलाय जच्चा क्या फरमावो
देस इन रसोई निपाय इना घर में
म्हारा कोने खाट बिछाय इना घर में
नणदल खे बेग बुलाय इना घर में
नणदल बुलाय जच्चा क्या फरमाओ
म्हारा कंवळे सांतीपुड़ा मांडे इना घर में
पड़ोसण खे बेग बुलाव इना घर में
पड़ोसण बुलाय जच्चा क्या फरमावो
म्हारे इस दन मंगल गवाड़ो इना घर में
जोसीड़ा खे बेग बुलावो इना घर में
जोसीड़ो बुलाय जच्चा क्या फरमावो
म्हारा नाना को नाम धरावो इना घर में
ढोली बुलाय जच्चा क्या फरमावो
ढोली बुलाय जच्चा क्या फरमावो
दस दन ढोल बजाव इना घर में