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रणिहाट नी जाणू गजेसिंह, हल जोता का दिन, गजेसिंह / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

रणिहाट नी जाणू गजेसिंह, हल जोता का दिन, गजेसिंह
छिः दारु नी पेणी गजेसिंह, रणिहाट नी जाणू, गजेसिंह
हौंसिया छै बैख गजेसिंह, बड़ा बाबू को बेटा, गजेसिंह
त्यरा कानू कुंडल गजेसिंह, त्यरा हातू धगुला, गजेसिंह
त्वे राणी लूटली गजेसिंह, रणिहाट नी जाणू, गजेसिंह
तेरो बाबू मारेणे गजेसिंह, राणिहाट नी जाणू गजेसिंह
बैरियों का बदाण गजेसिंह, सांपू का डिस्याण, गजेसिंह
बड़ा बाबू को बेटा गजेसिंह, दरोलो नी होणो, गजेसिंह
मर्द मरी जाँदा गजेसिंह, बोल रई जांदा, गजेसिंह।

शब्दार्थ