भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

रथ ठाड़े करो रघुबीर / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

रथ ठांड़े करो रघुबीर,
तुम्हारे संग मैं चलूं वनवास खों।
अरे हां जी तुम्हारे,
काहे के रथला बने, है
अरे काहे के डरे हैं बुनाव
तुम्हारे संग ...
अरे हां हो हमारे,
चन्दन के रथला बने,
और रेशम डरे हैं बुनाव,
तुम्हारे संग ...
अरे हां जी तुम्हारे,
रथ में को जो बैठियो,
और हां जी रानी सीता,
रथ में बैठियो,
राजा राम जी हैं हांकनहार,
तुम्हारे संग ...
रथ ठांड़े करो...