भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

राजनीति / मुकेश मानस

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


एक

कितनी पार्टियां, कितने झंडे
कितनी लाईनें, कितने अजंडे
राजनीति के कितने फंदे
कितने धंधे
सीधी-साधी जनता पर
चल रहे हैं कितने रंदे

दो

आते ही रहेंगे भेड़िये
चोला बदल बदलकर
दरअसल ऐसा ही है
वोट की राजनीति का चक्कर

तीन

जनवाद के शीशे में
दिखते हैं आजकल
कई-कई चेहरे
अवसरवाद के
2002