भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

राजा दशरथ के चारो लाल दिन-दिन प्यारे लगे / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

राजा दशरथ के चारों लाल दिन-दिन प्यारे लगें
अंगना में खेलें चारों भैया,
चलत घुटरुअन चाल, दिन-दिन प्यारे लगे। राजा...
खुशी भई है तीनऊ मैया।
दशरथ खुशी अपार, दिन-दिन प्यारे लगे। राजा...
गुरू की दीक्षा लेके उनने
मारे निशाचर तमाम, दिन दिन प्यारे लगें। राजा...
स्वयंबर भयो जनक नगर में
ब्याहे चारों-भाई, दिन-दिन प्यारे लगें। राजा...
ब्याह के आये अवध नगर खों
खुशी भये नर नारि, दिन-दिन प्यारे लगें। राजा...