चलु राही द्वापर कें हाल सुनी लेहु रामा।
शुरु शुरु ययाति के राज हो सांवलिया॥7॥
बड़ सूर-बीर रामा धरमा निपुणमा हो।
ओन धोन से पूर छिलैय राज हो सांवलिया॥
राजा ययाति के ते वर सुकुमार रामा।
यदु अरु पुरु दुअ लाल हो सांवलिया॥8॥
कोमल, किसोर विदमान मृदुभाषिया हो।
पुरु के दुलार राजा करैय हो सांवलिया॥
सब गुण आगर बनाय पालि-पोसी रामा।
राज सौंपी बन पग धारैया हो सांवलिया॥9॥