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राम के मथवा लुटिरिया, देखत नीक लागय हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

आँख अँजाई

राम के मथवा[1] लुटिरिया,[2] देखत नीक[3] लागय हे।
ललना, ब्ररह्मा जे दिहले लुटुरिया, अधिको छबि लागय हे॥1॥
राम के माथे तिलकवा, तिलक भल सोभय हे।
ललना, चन्नन दिहले बसिट्ठ,[4] अधिको छबि लागय हे॥2॥
राम के अँखिया रतनारि, काजर भल सोभय हे।
ललना, काजर दिहले सुभदरा,[5] देखत नीक लागय हे, अधिको छबि लागय हे॥3॥
राम के पाँव पैजनियाँ, पाँव भल सोभय हे।
ललना, ठुमुकि चलले अँगनवाँ, देखत नीक लागय हे॥4॥

शब्दार्थ
  1. मस्तक में
  2. बालों के लटदार गुच्छे
  3. अच्छा, भला, सुन्दर
  4. वसिष्ठ
  5. सुभद्रा देवी। कृष्ण की बहन और अर्जुन की स्त्री