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राह पुरखार है , लेकिन ये सफ़र करना है / ओम प्रकाश नदीम

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राह पुरखार[1] है, लेकिन ये सफ़र करना है ।
चलना दुश्वार है लेकिन ये सफ़र करना है ।

धूप के साथ ही रुख़ अपना बदल देती है,
छाँव मक्कार है लेकिन ये सफ़र करना है ।

पाँव में धर्म की ज़ंजीर है, और बातिल[2] की,
सर पे तलवार है लेकिन ये सफ़र करना है ।

गाँव से तार ये आया है कि बीमार है माँ,
आज त्योहार है लेकिन ये सफ़र करना है ।

हमको मालूम है इस राह में आगे चल कर,
ख़तरा-ए-दार है लेकिन ये सफ़र करना है ।

शब्दार्थ
  1. काँटों भरी
  2. असत्य