भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रिस्ता / शिवदान सिंह जोलावास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भरोसा री भींत माथै
ऊभा है रिस्ता।
 
चांद, तारा, समंदर अर बिरखा
फगत झूठा दिलासा है।
 
साच पूछो तो
पसीनै री गंध
अर लहू सूं काठा बंध्योड़ा है
रिस्ता।