भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रूपक / रामकृष्ण वर्मा 'बलवीर'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गोरा गोरा रंग हौ भभुतवा रमौले मानो सेली लाल ललिया लकीर।
रूपवा के भिखिया पलकिया में माँगे ‘बलविरिवा’ की अँखियाँ फकीर।।
झपझप-झपकेली सोई मानो गोरिया री झुक-झुक करेली सलाम।
(तोरे) गोड़वा की धुरिया बरौनियाँ से पोंछें ‘बलविरिवा’ के अँखिया गुलाम।।